जयपुर – विगत 15 दिनों से प्रदेश की राजधानी की जनसंख्या खासी बढ़ी हुई थी और ये जनसंख्या बढ़ाने वाली भीड़ मुख्य तौर पर रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, सी स्कीम स्थित शासन सचिवालय, सिविल लाइन्स स्थित मंत्रियों के बंगलों, लाल कोठी स्थित विधायक आवास और गांधी नगर के बड़े अफसरों के बंगलों के आस-पास लगातार दिखाई दे जाती थीI शहर की सडकों पर भी अमूमन RJ 14, RJ 59 और RJ 60 के अलावा अन्य जिलों की वाहन रजिट्रेशन प्लेट बहुत ज्यादा नहीं दिखती थीं लेकिन बीते पखवाड़े में प्रदेश के लगभग हर जिले कारें और एसयूवी राजधानी के बदहाल ट्रैफिक को और बदमज़ा करती नज़ए आई I इस सब की वजह थी राजधानी जयपुर में चल रहा तबादला उत्सव जो कि औपचारिक रूप से 10 जुलाई की शाम को समाप्त हो गया परन्तु अन्दरखाने ट्रांसफर लिस्ट शनिवार और रविवार को भी बनती और जारी होती रही I
राजकाज न्यूज़ को सरकारी सूत्रों ने बताया कि अब तक जारी तबादला सूची से भरी असंतोष महसूस किया जा रहा है इसीलिए सोमवार और मंगलवार यानि 13 और 14 जुलाई को भी करीब दो दर्जन संशोधित तबादला सूचियां आएंगी I एक रिटायर्ड सीनियर अफसर का कहना है कि सीमित मात्रा में संशोधन भले ही हो जाए मगर व्यापक रुप से किसी ट्रांसफर लिस्ट का झुनझुना सिर्फ आस लगाए बैठे लोगों के रोष को कम करने का ही एक तरीका है I
वैसे अब तक जो तबादला सूचियां जारी हुई उसमें कई रोचक मामले भी देखने को मिले जिनसे तबादला उत्सव की कुछ अंदरूनी सच्चाई भी साफ़ दिखाई पड़ती है I

केस न – 1 – एक सेवानिवृत्त भूगोल केर प्रोफेसर साहब का ट्रांसफर कर शिक्षा विभाग के बाबुओं ने अति सक्रियता दिखाई।

केस – 2 – कहां तो एक तरफ पुलिस विभाग में मनचाहे तबादले को लोग तरस जाते हैं और कहां कुछ रसूख वाले ऐसे होते हैं कि उनका एक ही लिस्ट में एक ही पेज पर दो अलग अलग जगह ट्रांसफर कर दिया जाता है। कुछ ऐसा ही हुआ पुलिस कांस्टेबल चेतराम के साथ जिन्हें चित्तौड़गढ़ से डीग और चित्तौड़गढ़ से खैरथल-तिजारा दोनों जगह स्थान्तरित कर दिया गया।

केस – 3 – वन विभाग ने तो अपनी ट्रांसफर लिस्ट में उस समय कमाल ही कर दिया जब बाबुओं ने तीन महीने पहले आत्महत्या कर चुके वनपाल अखिलेश डूडी को सरिस्का में वायरलैस ड्यूटी पर लगा दिया।

केस – 4 – वसुंधरा सरकार में चिकित्सा मंत्री रहे डॉ दिगंबर सिंह के पुत्र शैलेश सिंह जो कि डीग-कुम्हेर से विधायक हैं, उन्होने बालोतरा जिले में लगे एक पटवारी के डीग में ट्रांसफर की डिजायर लिखी थी। अब इस डिजायर का ट्रांसफर लिस्ट टाइप कर रहे बाबू पर इतना असर हुआ कि उस बाबू ने पटवारी का नाम लिखने की जगह एमएलए शैलेश दिगंबर सिंह का ही नाम लिख दिया।










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