लीजिये फिर से आपकी सेवा में हाज़िर है आपका अपना न्यूज़ पोर्टल राजकाज न्यूज़। नाम चूंकि मेरी और मेरे दर्शकों की साझी पसंद का है इसलिए सिर्फ नाम ही पुराना है बाकी न्यूज़ पोर्टल में सब कुछ नए कलेवर में होगा। साफ बात है जब प्रदेश में हजारों न्यूज पोर्टल्स और यूट्यूब चैनल पहले से ही चल रहे हैं तो फिर क्या वजह है कि उस भीड़ भरे महानगर में मैं भी खुदके लिए जगह बनाने की कोशिश करूं? वजह बेहद साफ है। अगर आप 99% न्यूज पोर्टल्स और यूट्यूब चैनल को देखेंगे, मैं राजस्थान के संदर्भ में ज्यादा बात कर रहा हूं, तो आप पाएंगे कि वह पत्रकारिता नहीं बल्कि इवेंट रिपोर्टिंग कर रहे हैं माने नहीं CM कहीं गए वह बता दिया, कहीं आग लग गई वह बता दिया, कहीं कोई दुर्घटना हो गई वह बता दिया, पुलिस ने कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बताया कि किसी बड़े अपराधी को पकड़ लिया तो वह वह बता दिया लेकिन रिपोर्टिंग नहीं या कम ही देखने को मिलती है। कुछ मुट्ठी भर लोग हैं जो इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म को. ज़िंदा रखे हुए हैं । यहां तक की मेन स्ट्रीम मीडिया के बड़े-बड़े मीडिया हाउसेस भी जो खोजी पत्रकारिता की रिपोर्ट अपने पहले पन्ने पर छाप रहे हैं उनका अक्सर सीधा सरकार के मंत्री और मुखियाओं से लेना देना कम ही होता है और अगर गोद में कोई चीज आ ही पड़े तो फिर थोड़ा बहुत रस्म अदायगी कर दी जाती हैं। यह इतने शक्तिशाली होते हैं कि लो प्रोफाइल राज्य मंत्री और मंत्री स्तर के लोगों की तो खबर चला सकते हैं लेकिन आप मेरा इशारा समझिए कि असल में जिम्मेदारों को कटघरे में खड़े करने का काम पूरी तरीके से बंद हो चुका है। जब तक की सरकारी एजेंसीयां ही सक्रिय ना हो जाएं। जाहिर बात है कि एक छोटा संस्थान होने की वजह से मेरे अपने बहुत सीमित संसाधन है लेकिन इन्हीं सीमित संसाधनों में मेरा पूरा प्रयास रहेगा कि जो बात पूरे मैन स्ट्रीम मीडिया ने आपसे छुपाई मैं चाहे उसकी एक तह ही खोलूं लेकिन सच आपके सामने लाने के लिए राजकाज के रिपोर्टर्स की टीम के साथ में ऐसा करने का पूरे दिल से प्रयास जरूर करूंगा।
दूसरे जैसा कि हमारे पोर्टल के नाम से आप देखेंगे राज का काज तो मैं अगर ब्यूरोक्रेसी की खबरें ना दूं और वह भी तथ्य परक खबरें तो तब तक इस नाम को जस्टिफाई करना नहीं होगा तो आप निश्चित मानिए मैं कहीं से भी खबर ढूंढ के लाऊं लेकिन मैं ब्यूरोक्रेसी की खबरें आप तक पहुंचाऊंगा क्योंकि पॉलीटिकल पार्टी की सरकारें बदलती हैं असल में कुर्सियों पर जो लोग बैठते हैं जो ब्यूरोक्रेट्स बैठते हैं उनमें 30 से 40% बदलाव होता है 60% चेहरे पुराने होते हैं यानी हर मुसीबत का सही जवाब ये नौकरशाह ही होते हैं। मेरा प्रयास होगा कि उन लोगों की खबरें आप तक पहुंचे जिससे उन लोगों पर भी चाहे थोड़ी सी सही लेकिन लगाम तो कसी जा सके।आखिर हम एक लोकतंत्र में रहते हैं तो कैसे हम ब्यूरोक्रेट्स के सामने अपने घुटने टेक कर अपने अधिकारों को भूल जाए। मेरा मानना है अगर ब्यूरोक्रेट्स अपना काम अच्छे से करेंगे नियमों के तहत करेंगे तो फिर कोई भी राजनीतिक दल सत्ता में हो वह भी कम से कम आटे में नमक जैसा ही काम करने का प्रयास करेगा अब की तरह नमक में आटा नहीं मिलेगा। आप सब की शुभकामनाओं कि मुझे बहुत जरूरत है, हमारी पूरी टीम को जरूरत है। और हमारे सबसे सजग रिपोर्टर तो आप दर्शक हैं। आप हमें व्यक्तिगत संपर्क कर सकते हैं हमारी ईमेल आईडी पर और आपके पास अगर कोई खबर है तो आप हमसे शेयर कीजिए हम आपका नाम गुप्त रखते हुए उसे खबर को बिल्कुल सही परिपेक्ष में एकदम निर्भीक होकर जनता के सामने रखेंगे अभी के लिए बस इतना अब राजकाज को आपके साथ की जरूरत है ताकि राज भी सुधरे और का आज भी ठीक हो जाय। भारत माता की जय, धोरों की धरती को नमन 🙏
सादर
प्रवीण दत्ता
प्रधान संपादक
राजकाज न्यूज़





Leave a Reply